Home छत्तीसगढ़ 21 जून को विश्व योग अमृत उत्सव – शिवनारायण मूंधड़ा “वास्तु मित्र”

21 जून को विश्व योग अमृत उत्सव – शिवनारायण मूंधड़ा “वास्तु मित्र”

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21 जून को विश्व योग अमृत उत्सव – शिवनारायण मूंधड़ा “वास्तु मित्र”

हर वर्ष की तरह इस 11 वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को एक पर्व की तरह पूरे विश्व में मनाया जाएगा। इस वर्ष का विषय है –
योगा फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ
स्वयंप्रभा ध्यान के संस्थापक श्री शिव नारायण मूंधड़ा ने बताया कि आज पूरा विश्व किसी न किसी आंतरिक एवं बाहरी समस्याओं से जूझ रहा है चाहे आपसी या पड़ोसी देश से युद्ध का मुद्दा हो, मूल निवासी और अनुप्रवेशकारी प्रवासी के बीच की समस्याएं हो, जाति, धर्म, पर्यावरण इत्यादि कई कारण है जो मानव एवं जगत के बीच समस्याएं उत्पन्न कर दी है।
ऐसे में पृथ्वी को बचाना एवं अपने आप को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रखना अति आवश्यक है। हर वर्ष योग दिवस न सिर्फ व्यक्तिगत लाभ के लिए मनाया जाता है बल्कि योग का जो सही अर्थ होता है पूरे सृष्टि के बीच एक तादात्म्यता उत्पन्न करना है। इस दिशा में हम सभी कदम बढ़ाते जा रहे हैं।
“अयं बन्धुरयंनेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम।“ अर्थात यह व्यक्ति मेरा है, यह व्यक्ति मेरा नही है का भेद संकीर्ण सोच वाले ही करते हैं। उत्तम चरित्र वालों के लिए पूरा विश्व ही परिवार है। ऐसी सोच, उदार हृदय की प्राप्ति योग के द्वारा ही संभव है। ईशावास्योपनिषद् मे ईश्वर की सर्वव्यापकता को बताते हुए कहा गया है कि मनुष्य को लोभ, लालच नहीं करना चाहिए। प्रकृति में उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग उतना ही करो जितना जीवन जीने के लिए आवश्यक हो, भोग के लिए नहीं। कामनाओं की पूर्ति के लिए जगत के चीजों का अत्यधिक उपयोग करना, न सिर्फ अपना विनाश का कारण है, उससे पृथ्वी का भी संतुलन बिगड़ता है, जिसके कारण शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक समस्या होने लगती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को कदम दर कदम को समझाते हुए स्वयंप्रभा श्री मूंधड़ा ने बताया कि आज का दिन योग के बीज का रोपण का है। क्योंकि आज से सूर्य दक्षिणागामी हो जाता है।
श्री मूंधड़ा ने ध्यान योग के लाभ बताते हुए कहा कि
① शरीर स्वस्थ होता है। ② मानसिक सुस्ती खत्म होती है। ③ एकाग्रता और स्मरण शक्ति का विकास होता है। ④ कार्यक्षमता बढ़ती है। ⑤ शारीरिक रोग ठीक होते हैं आदि।
स्वयंप्रभा ने पूर्ण स्वास्थय के लिए पांच बातें बताई
① सुमन – शांत मन ② तन – निरोगी शरीर, ③ विवेक – शुद्ध बुद्धि ④ होश – जागृत चेतना और ⑤ उद्देश्य – जीवन लक्ष्य ।
श्री मूंधड़ा ने योग – ध्यान के मित्रों का उल्लेख किया कि
① एकाग्रता(साधन) ② सामूहिकता ③ सत्संग ④ निरन्तरता पर जोर दिया।
उन्होंने ① निराशा ②शंका ③ इंद्रिय सुख ④ आलस्य को योग के शत्रु बताया।
इसके लिए हमें अपने मन का प्रशिक्षित करना होगा जैसे – ① मन को शुद्ध करना। ② मन को जानना। ③ मन को देखना। ④ मन का स्वामी होना।
योग के पांच चरण है ① शिथिलता (Relaxtion) ② प्रार्थना (समर्पण) ③ देखने की कला ④ समझ व विश्वास ⑤संजीवनी निद्रा।
योग में सहायक है- ① समय (कम से कम 20 मि.)। ② शरीर का आसन, पेट ठीक हो। ③ मुद्रायें – पूर्ण स्थिती। ④ स्थान। ⑤ शरीर सन्तुलन ।
स्वयंप्रभा मूंधड़ा जी ने बताया कि –
1. अहंकार से – हड्डि‌यों में अकड़न।
2. कपट से – गले व फेफड़ा खराब।
3. जिद से – पेट के रोग ।
4. क्रोध से – लीवर, गाल ब्लैडर में सूजन।
5. भय से – किड़‌नी व मूत्राशय का असंतुलन।
6. तनाव, चिंता से – पैंक्रियाज में बीमारी।
7. अधीरता से – हृदय, छोटी आंत की बीमारी।
8. दुःख दबाने से – फेफड़े व बड़ी आंत में गड़बड़ी हो सकती है। हमें मानसिक रोग हो सकते है
योग -प्राणायम से सकरात्मक विचारों से प्रेम, आनन्द व शांति की अनुभूति होती हैं। स्वयंप्रभा ध्यान अपने आपसे मिलने की क्रिया है। अपने से स्व-संवाद है।
एक खुला
32 खिले
32 सौ रक्तवाहिनियाँ मुस्कुराई
32 हजार मॉसपेशियों ने ली अंगड़ाई
32 लाख रोमकूप खुले
हजार करोड़ तारे खिलखिलाए
चंदा हँसा, सूरज हँसा
मन भीतर बसा इंसान हँसा।
जय योग – जय ध्यान।
शिवनारायण मूँधड़ा “वास्तु मित्र”
संस्थापक स्वयंप्रभा ध्यान मोबा.: 94252-02721