हमें विकसित भारत के लिए मिलकर काम करना है – पीएम मोदी ने लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित किया
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित किया. ये लगातार 12वां साल था जब पीएम मोदी लाल किले से राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. पीएम मोदी का आज का भाषण कई मायनों में खास रहा. पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर, राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक वृद्धि और अपनी सरकार के विस्तारित कल्याण मॉडल का जिक्र किया. पढ़ें पीएम मोदी ने अपने संबोधन में और क्या कुछ कहा
हमें विकसित भारत के लिए मिलकर काम करना है – पीएम मोदी
पीएम मोदी ने लाल किले के प्राचीर से कहा कि मैंने इसी लाल किले से पंचप्रण की बात की थी. विकसित भारत बनाने के लिए ना हम रुकेंगे ना हम झुकेंगे. हम मेहनत करते रहेंगे. 2047 में विकसित भारत बनाकर के रहेंगे. हमारा दूसरा प्रण है हम हमारे जीवन में गुलामी का एक भी कण बचने नहीं देंगे. हम हर प्रकार की गुलामी से मुक्ति पाकर रहेंगे. हम अपनी विरासत पर गर्व करेंगे. हमारी पहचान का सबसे बड़ा आभूषण हमारी विरासत है. इन सबके लिए एकता, ये मंत्र सबसे बड़ा शक्तिशाली मंत्र है.
पीएम मोदी ने आगे कहा कि एकता की डोर को कोई काट ना सके ये हमारा सबसे बड़ा संकल्प होगा. मां भारती के प्रति कर्तव्य निभाना किसी पूजा से कम नहीं है. हम सब मातृभूमि के कल्याण के लिए 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को पार करने के लिए अपने आप को खपा देंगे. अपने आप को झोंक देंगे. किसी भी अवसर को छोड़ेंगे नहीं. नए अवसर बनाएंगे. 140 करोड़ के सामर्थ्य से आगे बढ़ते रहेंगे. हमें याद रखना है कि परिश्रम में जो तपा है उसने ही तो इतिहास रचा है. जिसने फौलादी चट्टानों को तोड़ा है, उसने ही समय को मोड़ा है. और समय मोड़ देने का भी यही समय है सही समय है.
मिशन सुदर्शन चक्र से देश को और सुरक्षित बनाएंगे – पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि जब युद्ध के टेक्नोलॉजी का विस्तार हो रहा है तो राष्ट्र की रक्षा के लिए हमें भी अपनी महारथ का और विस्तार करने की जरूरत है. इसलिए मैंने एक संकल्प लिया है, मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए. क्योंकि समृद्धि कितनी ही क्यों ना हो लेकिन अगर सुरक्षा के प्रति उदासीनता बरतें है तो इसलिए सुरक्षा का महत्व बहुत बड़ा है. 2035 तक राष्ट्र के सभी महत्वपूर्ण स्थलों जिनमें सामरिक के साथ सिविलियन क्षेत्र भी शामिल हैं जैसे अस्पताल रेलवे, आस्था के केंद्र हो उन्हें टेक्नोलॉजी के नए तंत्र के तहत सुरक्षा का कवच दिया जाएगा. देश का हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे. किसी भी प्रकार की टेक्नोलॉजी हमपर वार करने आ जाए हमारी टेक्नोलॉजी उससे बेहतर साबित हो. इसलिए अगले दस साल में भगवान कृष्ण से प्रेरणा पाकर उनके सुदर्शन चक्र की राह को चुना है. जब महाभारत की लड़ाई चल रही थी तब श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन ने सूर्य के प्रकाश को रोक दिया था. और दिन में ही अंधेरा कर दिया था.
अब देश सुदर्शन चक्र मिशन लॉन्च करेगा.
ये मिशन सुदर्शन चक्र एक पावर फुल वेपन सिस्टम दुश्मन के हमले को धारासायी करेगा और दुश्मन पर कई गुना ज्यादा ताकत से वापस हमला करेगा. हमने इस मिशन के लिए हमने कुछ मूलभूत बातें भी सोची हैं. ये पूरी तरह से आधुनिक सिस्टम पर आधारित होगा. ये सिस्टम हमारे देश के लोगों के द्वारा बनेगा. एक ऐसी व्यवस्था होगी जो वार फेयर के हिसाब से प्लस वन की स्ट्रैटजी में काम करेगी. तीसरा, टारगेटेड एक्शन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ेंगे. युद्ध के बदलते तौर-तरीकों में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इस कार्य को आगे बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात करता हूं.




