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प्राचार्य ई संवर्ग पदोन्नति प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियाँ

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प्राचार्य ई संवर्ग पदोन्नति प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियाँ

दिनांक 14 नवंबर 2025 को जारी प्राचार्य पद पर पदोन्नति हेतु आयोजित काउंसलिंग की क्रम सूची में ई संवर्ग व्याख्याताओं के संबंध में गंभीर विसंगतियाँ सामने आई हैं।
पूर्व में 30 अप्रैल 2025 को जारी वरिष्ठता सूची की तुलना में इस काउंसलिंग सूची में कई पदों पर अनुचित फेरबदल स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि—
● वरिष्ठ व्याख्याताओं को प्राथमिकता नहीं दी गई है।
● वर्ष 2012 में प्रधान पाठक पद पर पदोन्नत अधिकारी, जो सहायक शिक्षक से पदोन्नत होकर प्रधान पाठक बने थे, उनका नाम नियमित वरिष्ठ व्याख्याताओं से पहले रखा गया है, जबकि उन्हें हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी में कार्य करने का अनुभव भी नहीं है।

इसके साथ ही—
● वर्ष 2018 में पंचायत विभाग से शिक्षा विभाग में समाहित व्याख्याता एलबी, जो ई संवर्ग से जूनियर हैं, उन्हें भी काउंसलिंग सूची में अनुचित रूप से अग्रता दी गई है।

और भी चिंताजनक यह है कि—
● 1 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले व्याख्याता/प्रधान पाठक (पूर्व माध्यमिक) को भी पदोन्नति सूची में वरीयता देकर शामिल किया गया है, जबकि सेवानिवृत्ति एक सामान्य शासकीय प्रक्रिया है, जो सभी कर्मियों पर समान रूप से लागू होती है।

● अनेक विद्यालयों में वर्षों से प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत व्याख्याताओं को बिना काउंसलिंग के उसी विद्यालय में प्राचार्य पदोन्नति दी जा रही है, तथा उन्हें काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है।

● इतना ही नहीं, कई विद्यालयों में प्राचार्य पद रिक्त होने के बावजूद इन रिक्तियों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

ई संवर्ग व्याख्याताओं ने इस पूरी पदोन्नति प्रक्रिया पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है तथा न्यायसंगत, पारदर्शी और वरिष्ठता-आधारित पदोन्नति प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।